ईरान के चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद बाक़री ने सोमवार को रिपोर्टरों से बात करते हुए यह टिप्पणी की और ओमान सागर में दो ऑयल टैंकरों पर हुए हमलों का आरोप ईरान पर मढ़े जाने के प्रयासों के बारे में कहा, ईरान की सशस्त्र सेनाएं दुश्मन की हर चाल पर लगातार गहरी नज़र रखे हुए हैं।
गुरुवार 13 जून को ओमान सागर में दो ऑयल टैंकरों पर हमे के तुरंत ही बाद अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसका ज़िम्मेदार ईरान को ठहरा दिया, हालांकि उन्होंने अपने इस दावे के लिए किसी तरह का कोई प्रमाण पेश नहीं किया।
पोम्पियो के बाद तुरंत ही सऊदी अरब के विदेश मामलों में सलाहकार मंत्री आदिल अल-जुबैर ने भी ईरान के ख़िलाफ़ हमलों का निराधार आरोप मढ़ दिया। हालांकि फ़ार्स खाड़ी में इस तरह की घटना कोई पहली बार नहीं घटी है। इस क्षेत्र में विदेशी शक्तियों के हस्तक्षेप का मुख्य कारण साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियां हैं। आदिल अल-जुबैर ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकियों के चाबाए हुए शब्द बोलकर यह साबित कर रहे हैं कि उन्हें इस इलाक़े के इतिहास की कोई जानकारी नहीं है। अमरीका वर्षों से इस क्षेत्र में दो उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए प्रयास करता रहा है। साम्यवाद के के विस्तार और प्रभाव को फैलने से रोकना और क्षेत्रीय देशों के ऊर्जा स्रोतों को लूटना।
इसके बावजूद सऊदी अरब अमरीका की सेवा में जुटा हुआ है और ईरान को अस्थिर करना चाहता है। इसके अलावा क्षेत्र के कुछ और भी देश अपना भविष्य संकटों और क्षेत्र में विदेशियों की उपस्थिति में देखते हैं, हालांकि यह केवल एक भ्रम है।
आख़िर में हम यही कह सकते हैं कि ईरान, फ़ार्स खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ़ होरमुज़ की सुरक्षा का समर्थक है और इस इलाक़े की सुरक्षा को अपनी सुरक्षा समझता है।